वे लोग जो इस्लाम के शुरुआती दौर (622–632) में मदीना काल के दौरान मस्जिद-ए-नबवी के पिछले हिस्से में पनाह लिया करते थे। यह समूह ऐसा माना जाता है कि उन्हें तरीक़त की तालीम खुद पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दी थी।
वे लोग जो इस्लाम के शुरुआती दौर (622–632) में मदीना काल के दौरान मस्जिद-ए-नबवी के पिछले हिस्से में पनाह लिया करते थे। यह समूह ऐसा माना जाता है कि उन्हें तरीक़त की तालीम खुद पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दी थी।