तसव्वुफ़ दिव्य प्रेम की अवधारणा को कैसे देखता है?

Last Updated July 8, 2025

तसव्वुफ़ दिव्य प्रेम को अपने आध्यात्मिक मार्ग का सार मानता है, जो अल्लाह से गहरे, व्यक्तिगत संबंध पर ज़ोर देता है। यह प्रेम मात्र औपचारिक इबादत से ऊपर उठकर दिल से सच्ची भक्ति और स्वयं के दिव्य उपस्थिति में विलीन हो जाने तक पहुँचता है। साधक अपने दिल को शुद्ध करते हैं ताकि वह दिव्य प्रेम का पात्र बन सके, जिससे आंतरिक परिवर्तन होता है और मानव की इच्छा अल्लाह की इच्छा के अनुरूप हो जाती है।

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