अधिकतर संदर्भ स्रोत यह बताते हैं कि तसव्वुफ़ के चार स्तंभ हैं: तौबा (पश्चाताप), इख़लास (ख़ालिसियत), ज़िक्र (स्मरण) और मोहब्बत (प्रेम)। लेकिन सरकार यूसुफ़ शाह बाबा (रहमतुल्लाह अलैहि) ने अपनी तालीम को केवल शेख के प्रति सच्ची मोहब्बत पर केंद्रित किया है। यही अमल अपने आप अन्य सभी को भी साथ ले आता है। जब तक एक मुरिद अपने शेख से “सच्ची” मोहब्बत रखता है, तौबा और ज़िक्र के चरण अपने आप शुरू हो जाते हैं। हमें समझना चाहिए कि एक आम आदमी के लिए तौबा एक अजीब सी चीज़ है। यह तब तक शुरू नहीं होती जब तक कोई अंतहीन खिंचाव इंसान का ध्यान उसके ख़ालिक़ की तरफ़ न खींच ले। अपने ख़ालिक़ में चाहत जगाने के लिए सिर्फ यही क्रम चाहिए:
शेख की तरफ़ आकर्षण > जो सच्ची मोहब्बत में बदलता है > जो और आगे तौबा और निरंतर ज़िक्र लाता है।